चीनी कंपनी ने निकाले भारतीय कर्मचारी, तो पीएम मोदी ने उठाया ऐसा कदम जिसे देख रो पड़े चीनी

नई दिल्ली  : भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर जा पहुंचा है. हालांकि दोनों देशों ने सीधे तौर पर युद्ध का ऐलान तो नहीं किया है, लेकिन दोनों के बीच शीत युद्ध की शुरुआत हो गयी है. आइये आपको बताते है कि भारत को नीचा दिखाने के लिए चीन ने क्या चाल चली और कैसे पीएम मोदी के एक दांव से चीन की चाल उसी पर भारी पड़ गयी.

इस पूरे मामले की शुरआत तब हुई जब डोकलाम मामले पर तनाव के कारण चीनी टेलीकॉम कंपनी हुवावे ने ईरान में अपने सभी भारतीय कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया. दुनिया की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में से एक हुवावे ने तेहरान में काम करने वाले अपने सभी भारतीय कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से इसलिए निकाल दिया क्योंकि भारत डोकलाम मामले में पीछे नहीं हट रहा है.

इसकी जानकारी आईबी टाइम्ज़ ने दी. बताया गया कि भारत और चीन के बीच सीमावर्ती विवाद के कारण इस कंपनी में काम करने वाले भारतीयों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा. तेहरान में हुवावे कंपनी में काम करने वाले रोहित ने ट्विटर पर भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को संबोधित करते हुए ट्ववीट किया कि हुवावे ईरान ने अपने सभी भारतीय कर्मचारियों को निकाल दिया है और यह व्यापार से जुड़ा हुआ फ़ैसला नहीं है.

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ये खबर सोशल मीडिया में वायरल हो गयी और लोगों ने चीन के इस कदम की कड़ी निंदा की. इसके फ़ौरन बाद भारत में मोदी सरकार ने ऐसा जबरदस्त फैसला लिया, जिसे देख चीन को समझ आ गया कि भारत में वाकई 56 इंच वाले की मजबूत सरकार है.

सरकार ने पावर ट्रांसमिशन सेक्टर में नई कंपनियों की एंट्री के नियमों को कड़ा करने का फैसला ले लिया है. सरकार और इंडस्ट्री के अधिकारियों ने बताया कि संवेदनशील सेक्टर्स में चीन की बढ़ती पैठ पर नियंत्रण करने के लिए ऐसा किया जा रहा है. हार्बिन इलेक्ट्रिक, डॉन्गफैंग इलेक्ट्रॉनिक्स, शंघाई इलेक्ट्रिक और सिफांग ऑटोमेशन जैसी कई दिग्गज चीनी कंपनियां देश के 18 शहरों में उपकरणों की सप्लाइ कर रही हैं या फिर विद्युत वितरण का प्रबंधन कर रही हैं.Related image

देखिये मोदी सरकार का एक्शन

भारत में काफी नोट छाप लिए, अब इन सभी चीनी कंपनियों के धंधे बंद होंगे और वापस अपने देश लौटेंगे. स्थानीय भारतीय कंपनियां काफी लम्बे वक़्त से इस सेक्टर में चीन के बढ़ते दखल के खिलाफ यह कहते हुए आवाज उठाती रही हैं कि यह सुरक्षा के लिए खतरा है और बदले में उन्हें चीन के मार्केट में इस स्तर पर कारोबार करने की छूट नहीं है.

अब जबकि चीन ने शीत युद्ध की शुरुआत कर ही दी है, तो पीएम मोदी भी पूरी तरह से तैयार हैं. तुम हमारे भारतीय कर्मचारियों को नौकरी से निकालोगे, तो हम भारत से तुम्हारी अरबों रुपयों का व्यापार करने वाली कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाएँगे, जिससे एक-दो नहीं बल्कि लाखों चीनी नागरिकों की आजीविका का नुक्सान तो होगा ही, साथ ही चीनी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद भी हो जायेगी. भारत ने ऐसा कठोर फैसला लेकर मानो चीन को सीधी चुनौती दी है कि, आ जाओ, हम तैयार हैं.

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